وَٱلتِّينِ وَٱلزَّيۡتُونِ
आयत 1
अर्थ का अनुवादइन्जीर और ज़ैतून की क़सम
سُوْرَةُ التِّيْنِ
सूरह 95आयतें 8 अवतरण स्थान मक्कीजुज़ 30–30
بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
وَٱلتِّينِ وَٱلزَّيۡتُونِ
आयत 1
अर्थ का अनुवादइन्जीर और ज़ैतून की क़सम
وَطُورِ سِينِينَ
आयत 2
अर्थ का अनुवादऔर तूर सीनीन की
وَهَٰذَا ٱلۡبَلَدِ ٱلۡأَمِينِ
आयत 3
अर्थ का अनुवादऔर उस अमन वाले शहर (मक्का) की
لَقَدۡ خَلَقۡنَا ٱلۡإِنسَٰنَ فِيٓ أَحۡسَنِ تَقۡوِيمࣲ
आयत 4
अर्थ का अनुवादकि हमने इन्सान बहुत अच्छे कैड़े का पैदा किया
ثُمَّ رَدَدۡنَٰهُ أَسۡفَلَ سَٰفِلِينَ
आयत 5
अर्थ का अनुवादफिर हमने उसे (बूढ़ा करके रफ्ता रफ्ता) पस्त से पस्त हालत की तरफ फेर दिया
إِلَّا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّٰلِحَٰتِ فَلَهُمۡ أَجۡرٌ غَيۡرُ مَمۡنُونࣲ
आयत 6
अर्थ का अनुवादमगर जो लोग ईमान लाए और अच्छे (अच्छे) काम करते रहे उनके लिए तो बे इन्तेहा अज्र व सवाब है
فَمَا يُكَذِّبُكَ بَعۡدُ بِٱلدِّينِ
आयत 7
अर्थ का अनुवादतो (ऐ रसूल) इन दलीलों के बाद तुमको (रोज़े) जज़ा के बारे में कौन झुठला सकता है
أَلَيۡسَ ٱللَّهُ بِأَحۡكَمِ ٱلۡحَٰكِمِينَ
आयत 8
अर्थ का अनुवादक्या ख़ुदा सबसे बड़ा हाकिम नहीं है (हाँ ज़रूर है)