क़ुरआन ऑनलाइन गाइड

سُوْرَةُ الذَّارِياتِ

Adh-Dhaariyat

सूरह 51आयतें 60 अवतरण स्थान मक्कीजुज़ 26–27

بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

51:1

وَٱلذَّٰرِيَٰتِ ذَرۡوࣰ ا

आयत 1

अर्थ का अनुवादउन (हवाओं की क़सम) जो (बादलों को) उड़ा कर तितर बितर कर देती हैं

51:2

فَٱلۡحَٰمِلَٰتِ وِقۡرࣰ ا

आयत 2

अर्थ का अनुवादफिर (पानी का) बोझ उठाती हैं

51:3

فَٱلۡجَٰرِيَٰتِ يُسۡرࣰ ا

आयत 3

अर्थ का अनुवादफिर आहिस्ता आहिस्ता चलती हैं

51:4

فَٱلۡمُقَسِّمَٰتِ أَمۡرًا

आयत 4

अर्थ का अनुवादफिर एक ज़रूरी चीज़ (बारिश) को तक़सीम करती हैं

51:5

إِنَّمَا تُوعَدُونَ لَصَادِقࣱ‏

आयत 5

अर्थ का अनुवादकि तुम से जो वायदा किया जाता है ज़रूर बिल्कुल सच्चा है

51:6

وَإِنَّ ٱلدِّينَ لَوَٰقِعࣱ‏

आयत 6

अर्थ का अनुवादऔर (आमाल की) जज़ा (सज़ा) ज़रूर होगी

51:7

وَٱلسَّمَآءِ ذَاتِ ٱلۡحُبُكِ

आयत 7

अर्थ का अनुवादऔर आसमान की क़सम जिसमें रहते हैं

51:8

إِنَّكُمۡ لَفِي قَوۡلࣲ مُّخۡتَلِفࣲ‏

आयत 8

अर्थ का अनुवादकि (ऐ अहले मक्का) तुम लोग एक ऐसी मुख्तलिफ़ बेजोड़ बात में पड़े हो

51:9

يُؤۡفَكُ عَنۡهُ مَنۡ أُفِكَ

आयत 9

अर्थ का अनुवादकि उससे वही फेरा जाएगा (गुमराह होगा)

51:10

قُتِلَ ٱلۡخَرَّٰصُونَ

आयत 10

अर्थ का अनुवादजो (ख़ुदा के इल्म में) फेरा जा चुका है अटकल दौड़ाने वाले हलाक हों

51:11

ٱلَّذِينَ هُمۡ فِي غَمۡرَةࣲ سَاهُونَ

आयत 11

अर्थ का अनुवादजो ग़फलत में भूले हुए (पड़े) हैं पूछते हैं कि जज़ा का दिन कब होगा

51:12

يَسۡـَٔلُونَ أَيَّانَ يَوۡمُ ٱلدِّينِ

आयत 12

अर्थ का अनुवादउस दिन (होगा)

51:13

يَوۡمَ هُمۡ عَلَى ٱلنَّارِ يُفۡتَنُونَ

आयत 13

अर्थ का अनुवादजब इनको (जहन्नुम की) आग में अज़ाब दिया जाएगा

51:14

ذُوقُواْ فِتۡنَتَكُمۡ هَٰذَا ٱلَّذِي كُنتُم بِهِۦ تَسۡتَعۡجِلُونَ

आयत 14

अर्थ का अनुवाद(और उनसे कहा जाएगा) अपने अज़ाब का मज़ा चखो ये वही है जिसकी तुम जल्दी मचाया करते थे

51:15

إِنَّ ٱلۡمُتَّقِينَ فِي جَنَّٰتࣲ وَعُيُونٍ

आयत 15

अर्थ का अनुवादबेशक परहेज़गार लोग (बेहिश्त के) बाग़ों और चश्मों में (ऐश करते) होगें

51:16

ءَاخِذِينَ مَآ ءَاتَىٰهُمۡ رَبُّهُمۡۚ إِنَّهُمۡ كَانُواْ قَبۡلَ ذَٰلِكَ مُحۡسِنِينَ

आयत 16

अर्थ का अनुवादजो उनका परवरदिगार उन्हें अता करता है ये (ख़ुश ख़ुश) ले रहे हैं ये लोग इससे पहले (दुनिया में) नेको कार थे

51:17

كَانُواْ قَلِيلࣰ ا مِّنَ ٱلَّيۡلِ مَا يَهۡجَعُونَ

आयत 17

अर्थ का अनुवाद(इबादत की वजह से) रात को बहुत ही कम सोते थे

51:18

وَبِٱلۡأَسۡحَارِ هُمۡ يَسۡتَغۡفِرُونَ

आयत 18

अर्थ का अनुवादऔर पिछले पहर को अपनी मग़फ़िरत की दुआएं करते थे

51:19

وَفِيٓ أَمۡوَٰلِهِمۡ حَقࣱّ لِّلسَّآئِلِ وَٱلۡمَحۡرُومِ

आयत 19

अर्थ का अनुवादऔर उनके माल में माँगने वाले और न माँगने वाले (दोनों) का हिस्सा था

51:20

وَفِي ٱلۡأَرۡضِ ءَايَٰتࣱ لِّلۡمُوقِنِينَ

आयत 20

अर्थ का अनुवादऔर यक़ीन करने वालों के लिए ज़मीन में (क़ुदरते ख़ुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं

51:21

وَفِيٓ أَنفُسِكُمۡۚ أَفَلَا تُبۡصِرُونَ

आयत 21

अर्थ का अनुवादऔर ख़ुदा तुम में भी हैं तो क्या तुम देखते नहीं

51:22

وَفِي ٱلسَّمَآءِ رِزۡقُكُمۡ وَمَا تُوعَدُونَ

आयत 22

अर्थ का अनुवादऔर तुम्हारी रोज़ी और जिस चीज़ का तुमसे वायदा किया जाता है आसमान में है

51:23

فَوَرَبِّ ٱلسَّمَآءِ وَٱلۡأَرۡضِ إِنَّهُۥ لَحَقࣱّ مِّثۡلَ مَآ أَنَّكُمۡ تَنطِقُونَ

आयत 23

अर्थ का अनुवादतो आसमान व ज़मीन के मालिक की क़सम ये (क़ुरान) बिल्कुल ठीक है जिस तरह तुम बातें करते हो

51:24

هَلۡ أَتَىٰكَ حَدِيثُ ضَيۡفِ إِبۡرَٰهِيمَ ٱلۡمُكۡرَمِينَ

आयत 24

अर्थ का अनुवादक्या तुम्हारे पास इबराहीम के मुअज़िज़ मेहमानो (फ़रिश्तों) की भी ख़बर पहुँची है कि जब वह लोग उनके पास आए

51:25

إِذۡ دَخَلُواْ عَلَيۡهِ فَقَالُواْ سَلَٰمࣰ اۖ قَالَ سَلَٰمࣱ قَوۡمࣱ مُّنكَرُونَ

आयत 25

अर्थ का अनुवादतो कहने लगे (सलामुन अलैकुम) तो इबराहीम ने भी (अलैकुम) सलाम किया (देखा तो) ऐसे लोग जिनसे न जान न पहचान

51:26

فَرَاغَ إِلَىٰٓ أَهۡلِهِۦ فَجَآءَ بِعِجۡلࣲ سَمِينࣲ‏

आयत 26

अर्थ का अनुवादफिर अपने घर जाकर जल्दी से (भुना हुआ) एक मोटा ताज़ा बछड़ा ले आए

51:27

فَقَرَّبَهُۥٓ إِلَيۡهِمۡ قَالَ أَلَا تَأۡكُلُونَ

आयत 27

अर्थ का अनुवादऔर उसे उनके आगे रख दिया (फिर) कहने लगे आप लोग तनाउल क्यों नहीं करते

51:28

فَأَوۡجَسَ مِنۡهُمۡ خِيفَةࣰۖ قَالُواْ لَا تَخَفۡۖ وَبَشَّرُوهُ بِغُلَٰمٍ عَلِيمࣲ‏

आयत 28

अर्थ का अनुवाद(इस पर भी न खाया) तो इबराहीम उनसे जो ही जी में डरे वह लोग बोले आप अन्देशा न करें और उनको एक दानिशमन्द लड़के की ख़ुशख़बरी दी

51:29

فَأَقۡبَلَتِ ٱمۡرَأَتُهُۥ فِي صَرَّةࣲ فَصَكَّتۡ وَجۡهَهَا وَقَالَتۡ عَجُوزٌ عَقِيمࣱ‏

आयत 29

अर्थ का अनुवादतो (ये सुनते ही) इबराहीम की बीवी (सारा) चिल्लाती हुई उनके सामने आयीं और अपना मुँह पीट लिया कहने लगीं (ऐ है) एक तो (मैं) बुढ़िया (उस पर) बांझ

51:30

قَالُواْ كَذَٰلِكِ قَالَ رَبُّكِۖ إِنَّهُۥ هُوَ ٱلۡحَكِيمُ ٱلۡعَلِيمُ

आयत 30

अर्थ का अनुवादलड़का क्यों कर होगा फ़रिश्ते बोले तुम्हारे परवरदिगार ने यूँ ही फरमाया है वह बेशक हिकमत वाला वाक़िफ़कार है

51:31

۞قَالَ فَمَا خَطۡبُكُمۡ أَيُّهَا ٱلۡمُرۡسَلُونَ

आयत 31

अर्थ का अनुवादतब इबराहीम ने पूछा कि (ऐ ख़ुदा के) भेजे हुए फरिश्तों आख़िर तुम्हें क्या मुहिम दर पेश है

51:32

قَالُوٓاْ إِنَّآ أُرۡسِلۡنَآ إِلَىٰ قَوۡمࣲ مُّجۡرِمِينَ

आयत 32

अर्थ का अनुवादवह बोले हम तो गुनाहगारों (क़ौमे लूत) की तरफ भेजे गए हैं

51:33

لِنُرۡسِلَ عَلَيۡهِمۡ حِجَارَةࣰ مِّن طِينࣲ‏

आयत 33

अर्थ का अनुवादताकि उन पर मिटटी के पथरीले खरन्जे बरसाएँ

51:34

مُّسَوَّمَةً عِندَ رَبِّكَ لِلۡمُسۡرِفِينَ

आयत 34

अर्थ का अनुवादजिन पर हद से बढ़ जाने वालों के लिए तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से निशान लगा दिए गए हैं

51:35

فَأَخۡرَجۡنَا مَن كَانَ فِيهَا مِنَ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ

आयत 35

अर्थ का अनुवादग़रज़ वहाँ जितने लोग मोमिनीन थे उनको हमने निकाल दिया

51:36

فَمَا وَجَدۡنَا فِيهَا غَيۡرَ بَيۡتࣲ مِّنَ ٱلۡمُسۡلِمِينَ

आयत 36

अर्थ का अनुवादऔर वहाँ तो हमने एक के सिवा मुसलमानों का कोई घर पाया भी नहीं

51:37

وَتَرَكۡنَا فِيهَآ ءَايَةࣰ لِّلَّذِينَ يَخَافُونَ ٱلۡعَذَابَ ٱلۡأَلِيمَ

आयत 37

अर्थ का अनुवादऔर जो लोग दर्दनाक अज़ाब से डरते हैं उनके लिए वहाँ (इबरत की) निशानी छोड़ दी और मूसा (के हाल) में भी (निशानी है)

51:38

وَفِي مُوسَىٰٓ إِذۡ أَرۡسَلۡنَٰهُ إِلَىٰ فِرۡعَوۡنَ بِسُلۡطَٰنࣲ مُّبِينࣲ‏

आयत 38

अर्थ का अनुवादजब हमने उनको फिरऔन के पास खुला हुआ मौजिज़ा देकर भेजा

51:39

فَتَوَلَّىٰ بِرُكۡنِهِۦ وَقَالَ سَٰحِرٌ أَوۡ مَجۡنُونࣱ‏

आयत 39

अर्थ का अनुवादतो उसने अपने लशकर के बिरते पर मुँह मोड़ लिया और कहने लगा ये तो (अच्छा ख़ासा) जादूगर या सौदाई है

51:40

فَأَخَذۡنَٰهُ وَجُنُودَهُۥ فَنَبَذۡنَٰهُمۡ فِي ٱلۡيَمِّ وَهُوَ مُلِيمࣱ‏

आयत 40

अर्थ का अनुवादतो हमने उसको और उसके लशकर को ले डाला फिर उन सबको दरिया में पटक दिया

51:41

وَفِي عَادٍ إِذۡ أَرۡسَلۡنَا عَلَيۡهِمُ ٱلرِّيحَ ٱلۡعَقِيمَ

आयत 41

अर्थ का अनुवादऔर वह तो क़ाबिले मलामत काम करता ही था और आद की क़ौम (के हाल) में भी निशानी है हमने उन पर एक बे बरकत ऑंधी चलायी

51:42

مَا تَذَرُ مِن شَيۡءٍ أَتَتۡ عَلَيۡهِ إِلَّا جَعَلَتۡهُ كَٱلرَّمِيمِ

आयत 42

अर्थ का अनुवादकि जिस चीज़ पर चलती उसको बोसीदा हडडी की तरह रेज़ा रेज़ा किए बग़ैर न छोड़ती

51:43

وَفِي ثَمُودَ إِذۡ قِيلَ لَهُمۡ تَمَتَّعُواْ حَتَّىٰ حِينࣲ‏

आयत 43

अर्थ का अनुवादऔर समूद (के हाल) में भी (क़ुदरत की निशानी) है जब उससे कहा गया कि एक ख़ास वक्त तक ख़ूब चैन कर लो

51:44

فَعَتَوۡاْ عَنۡ أَمۡرِ رَبِّهِمۡ فَأَخَذَتۡهُمُ ٱلصَّٰعِقَةُ وَهُمۡ يَنظُرُونَ

आयत 44

अर्थ का अनुवादतो उन्होने अपने परवरदिगार के हुक्म से सरकशी की तो उन्हें एक रोज़ कड़क और बिजली ने ले डाला और देखते ही रह गए

51:45

فَمَا ٱسۡتَطَٰعُواْ مِن قِيَامࣲ وَمَا كَانُواْ مُنتَصِرِينَ

आयत 45

अर्थ का अनुवादफिर न वह उठने की ताक़त रखते थे और न बदला ही ले सकते थे

51:46

وَقَوۡمَ نُوحࣲ مِّن قَبۡلُۖ إِنَّهُمۡ كَانُواْ قَوۡمࣰ ا فَٰسِقِينَ

आयत 46

अर्थ का अनुवादऔर (उनसे) पहले (हम) नूह की क़ौम को (हलाक कर चुके थे) बेशक वह बदकार लोग थे

51:47

وَٱلسَّمَآءَ بَنَيۡنَٰهَا بِأَيۡيْدࣲ وَإِنَّا لَمُوسِعُونَ

आयत 47

अर्थ का अनुवादऔर हमने आसमानों को अपने बल बूते से बनाया और बेशक हममें सब क़ुदरत है

51:48

وَٱلۡأَرۡضَ فَرَشۡنَٰهَا فَنِعۡمَ ٱلۡمَٰهِدُونَ

आयत 48

अर्थ का अनुवादऔर ज़मीन को भी हम ही ने बिछाया तो हम कैसे अच्छे बिछाने वाले हैं

51:49

وَمِن كُلِّ شَيۡءٍ خَلَقۡنَا زَوۡجَيۡنِ لَعَلَّكُمۡ تَذَكَّرُونَ

आयत 49

अर्थ का अनुवादऔर हम ही ने हर चीज़ की दो दो क़िस्में बनायीं ताकि तुम लोग नसीहत हासिल करो

51:50

فَفِرُّوٓاْ إِلَى ٱللَّهِۖ إِنِّي لَكُم مِّنۡهُ نَذِيرࣱ مُّبِينࣱ‏

आयत 50

अर्थ का अनुवादतो ख़ुदा ही की तरफ़ भागो मैं तुमको यक़ीनन उसकी तरफ से खुल्लम खुल्ला डराने वाला हूँ

51:51

وَلَا تَجۡعَلُواْ مَعَ ٱللَّهِ إِلَٰهًا ءَاخَرَۖ إِنِّي لَكُم مِّنۡهُ نَذِيرࣱ مُّبِينࣱ‏

आयत 51

अर्थ का अनुवादऔर ख़ुदा के साथ दूसरा माबूद न बनाओ मैं तुमको यक़ीनन उसकी तरफ से खुल्लम खुल्ला डराने वाला हूँ

51:52

كَذَٰلِكَ مَآ أَتَى ٱلَّذِينَ مِن قَبۡلِهِم مِّن رَّسُولٍ إِلَّا قَالُواْ سَاحِرٌ أَوۡ مَجۡنُونٌ

आयत 52

अर्थ का अनुवादइसी तरह उनसे पहले लोगों के पास जो पैग़म्बर आता तो वह उसको जादूगर कहते या सिड़ी दीवाना (बताते)

51:53

أَتَوَاصَوۡاْ بِهِۦۚ بَلۡ هُمۡ قَوۡمࣱ طَاغُونَ

आयत 53

अर्थ का अनुवादये लोग एक दूसरे को ऐसी बात की वसीयत करते आते हैं (नहीं) बल्कि ये लोग हैं ही सरकश

51:54

فَتَوَلَّ عَنۡهُمۡ فَمَآ أَنتَ بِمَلُومࣲ‏

आयत 54

अर्थ का अनुवादतो (ऐ रसूल) तुम इनसे मुँह फेर लो तुम पर तो कुछ इल्ज़ाम नहीं है

51:55

وَذَكِّرۡ فَإِنَّ ٱلذِّكۡرَىٰ تَنفَعُ ٱلۡمُؤۡمِنِينَ

आयत 55

अर्थ का अनुवादऔर नसीहत किए जाओ क्योंकि नसीहत मोमिनीन को फायदा देती है

51:56

وَمَا خَلَقۡتُ ٱلۡجِنَّ وَٱلۡإِنسَ إِلَّا لِيَعۡبُدُونِ

आयत 56

अर्थ का अनुवादऔर मैने जिनों और आदमियों को इसी ग़रज़ से पैदा किया कि वह मेरी इबादत करें

51:57

مَآ أُرِيدُ مِنۡهُم مِّن رِّزۡقࣲ وَمَآ أُرِيدُ أَن يُطۡعِمُونِ

आयत 57

अर्थ का अनुवादन तो मैं उनसे रोज़ी का तालिब हूँ और न ये चाहता हूँ कि मुझे खाना खिलाएँ

51:58

إِنَّ ٱللَّهَ هُوَ ٱلرَّزَّاقُ ذُو ٱلۡقُوَّةِ ٱلۡمَتِينُ

आयत 58

अर्थ का अनुवादख़ुदा ख़ुद बड़ा रोज़ी देने वाला ज़ोरावर (और) ज़बरदस्त है

51:59

فَإِنَّ لِلَّذِينَ ظَلَمُواْ ذَنُوبࣰ ا مِّثۡلَ ذَنُوبِ أَصۡحَٰبِهِمۡ فَلَا يَسۡتَعۡجِلُونِ

आयत 59

अर्थ का अनुवादतो (इन) ज़ालिमों के वास्ते भी अज़ाब का कुछ हिस्सा है जिस तरह उनके साथियों के लिए हिस्सा था तो इनको हम से जल्दी न करनी चाहिए

51:60

فَوَيۡلࣱ لِّلَّذِينَ كَفَرُواْ مِن يَوۡمِهِمُ ٱلَّذِي يُوعَدُونَ

आयत 60

अर्थ का अनुवादतो जिस दिन का इन काफ़िरों से वायदा किया जाता है इससे इनके लिए ख़राबी है

सेटिंग्स