क़ुरआन ऑनलाइन गाइड

سُوْرَةُ قٓ

Qaaf

सूरह 50आयतें 45 अवतरण स्थान मक्कीजुज़ 26–26

بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

قٓۚ وَٱلۡقُرۡءَانِ ٱلۡمَجِيدِ

आयत 1

अर्थ का अनुवादक़ाफ़ क़ुरान मजीद की क़सम (मोहम्मद पैग़म्बर हैं)

بَلۡ عَجِبُوٓاْ أَن جَآءَهُم مُّنذِرࣱ مِّنۡهُمۡ فَقَالَ ٱلۡكَٰفِرُونَ هَٰذَا شَيۡءٌ عَجِيبٌ

आयत 2

अर्थ का अनुवादलेकिन इन (काफिरों) को ताज्जुब है कि उन ही में एक (अज़ाब से) डराने वाला (पैग़म्बर) उनके पास आ गया तो कुफ्फ़ार कहने लगे ये तो एक अजीब बात है

أَءِذَا مِتۡنَا وَكُنَّا تُرَابࣰ اۖ ذَٰلِكَ رَجۡعُۢ بَعِيدࣱ‏

आयत 3

अर्थ का अनुवादभला जब हम मर जाएँगे और (सड़ गल कर) मिटटी हो जाएँगे तो फिर ये दोबार ज़िन्दा होना (अक्ल से) बईद (बात है)

قَدۡ عَلِمۡنَا مَا تَنقُصُ ٱلۡأَرۡضُ مِنۡهُمۡۖ وَعِندَنَا كِتَٰبٌ حَفِيظُۢ

आयत 4

अर्थ का अनुवादउनके जिस्मों से ज़मीन जिस चीज़ को (खा खा कर) कम करती है वह हमको मालूम है और हमारे पास तो तहरीरी याददाश्त किताब लौहे महफूज़ मौजूद है

بَلۡ كَذَّبُواْ بِٱلۡحَقِّ لَمَّا جَآءَهُمۡ فَهُمۡ فِيٓ أَمۡرࣲ مَّرِيجٍ

आयत 5

अर्थ का अनुवादमगर जब उनके पास दीन (हक़) आ पहुँचा तो उन्होने उसे झुठलाया तो वह लोग एक ऐसी बात में उलझे हुए हैं जिसे क़रार नहीं

أَفَلَمۡ يَنظُرُوٓاْ إِلَى ٱلسَّمَآءِ فَوۡقَهُمۡ كَيۡفَ بَنَيۡنَٰهَا وَزَيَّنَّٰهَا وَمَا لَهَا مِن فُرُوجࣲ‏

आयत 6

अर्थ का अनुवादतो क्या इन लोगों ने अपने ऊपर आसमान की नज़र नहीं की कि हमने उसको क्यों कर बनाया और उसको कैसी ज़ीनत दी और उनसे कहीं शिगाफ्त तक नहीं

وَٱلۡأَرۡضَ مَدَدۡنَٰهَا وَأَلۡقَيۡنَا فِيهَا رَوَٰسِيَ وَأَنۢبَتۡنَا فِيهَا مِن كُلِّ زَوۡجِۭ بَهِيجࣲ‏

आयत 7

अर्थ का अनुवादऔर ज़मीन को हमने फैलाया और उस पर बोझल पहाड़ रख दिये और इसमें हर तरह की ख़ुशनुमा चीज़ें उगाई ताकि तमाम रूजू लाने वाले

تَبۡصِرَةࣰ وَذِكۡرَىٰ لِكُلِّ عَبۡدࣲ مُّنِيبࣲ‏

आयत 8

अर्थ का अनुवाद(बन्दे) हिदायत और इबरत हासिल करें

وَنَزَّلۡنَا مِنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءࣰ مُّبَٰرَكࣰ ا فَأَنۢبَتۡنَا بِهِۦ جَنَّٰتࣲ وَحَبَّ ٱلۡحَصِيدِ

आयत 9

अर्थ का अनुवादऔर हमने आसमान से बरकत वाला पानी बरसाया तो उससे बाग़ (के दरख्त) उगाए और खेती का अनाज और लम्बी लम्बी खजूरें

وَٱلنَّخۡلَ بَاسِقَٰتࣲ لَّهَا طَلۡعࣱ نَّضِيدࣱ‏

आयत 10

अर्थ का अनुवादजिसका बौर बाहम गुथा हुआ है

رِّزۡقࣰ ا لِّلۡعِبَادِۖ وَأَحۡيَيۡنَا بِهِۦ بَلۡدَةࣰ مَّيۡتࣰ اۚ كَذَٰلِكَ ٱلۡخُرُوجُ

आयत 11

अर्थ का अनुवाद(ये सब कुछ) बन्दों की रोज़ी देने के लिए (पैदा किया) और पानी ही से हमने मुर्दा शहर (उफ़तादा ज़मीन) को ज़िन्दा किया

كَذَّبَتۡ قَبۡلَهُمۡ قَوۡمُ نُوحࣲ وَأَصۡحَٰبُ ٱلرَّسِّ وَثَمُودُ

आयत 12

अर्थ का अनुवादइसी तरह (क़यामत में मुर्दों को) निकलना होगा उनसे पहले नूह की क़ौम और ख़न्दक़ वालों और (क़ौम) समूद ने अपने अपने पैग़म्बरों को झुठलाया

وَعَادࣱ وَفِرۡعَوۡنُ وَإِخۡوَٰنُ لُوطࣲ‏

आयत 13

अर्थ का अनुवादऔर (क़ौम) आद और फिरऔन और लूत की क़ौम

وَأَصۡحَٰبُ ٱلۡأَيۡكَةِ وَقَوۡمُ تُبَّعࣲۚ كُلࣱّ كَذَّبَ ٱلرُّسُلَ فَحَقَّ وَعِيدِ

आयत 14

अर्थ का अनुवादऔर बन के रहने वालों (क़ौम शुऐब) और तुब्बा की क़ौम और (उन) सबने अपने (अपने) पैग़म्बरों को झुठलाया तो हमारा (अज़ाब का) वायदा पूरा हो कर रहा

أَفَعَيِينَا بِٱلۡخَلۡقِ ٱلۡأَوَّلِۚ بَلۡ هُمۡ فِي لَبۡسࣲ مِّنۡ خَلۡقࣲ جَدِيدࣲ‏

आयत 15

अर्थ का अनुवादतो क्या हम पहली बार पैदा करके थक गये हैं (हरगिज़ नहीं) मगर ये लोग अज़ सरे नौ (दोबारा) पैदा करने की निस्बत शक़ में पड़े हैं

وَلَقَدۡ خَلَقۡنَا ٱلۡإِنسَٰنَ وَنَعۡلَمُ مَا تُوَسۡوِسُ بِهِۦ نَفۡسُهُۥۖ وَنَحۡنُ أَقۡرَبُ إِلَيۡهِ مِنۡ حَبۡلِ ٱلۡوَرِيدِ

आयत 16

अर्थ का अनुवादऔर बेशक हम ही ने इन्सान को पैदा किया और जो ख्यालात उसके दिल में गुज़रते हैं हम उनको जानते हैं और हम तो उसकी शहरग से भी ज्यादा क़रीब हैं

إِذۡ يَتَلَقَّى ٱلۡمُتَلَقِّيَانِ عَنِ ٱلۡيَمِينِ وَعَنِ ٱلشِّمَالِ قَعِيدࣱ‏

आयत 17

अर्थ का अनुवादजब (वह कोई काम करता हैं तो) दो लिखने वाले (केरामन क़ातेबीन) जो उसके दाहिने बाएं बैठे हैं लिख लेते हैं

مَّا يَلۡفِظُ مِن قَوۡلٍ إِلَّا لَدَيۡهِ رَقِيبٌ عَتِيدࣱ‏

आयत 18

अर्थ का अनुवादकोई बात उसकी ज़बान पर नहीं आती मगर एक निगेहबान उसके पास तैयार रहता है

وَجَآءَتۡ سَكۡرَةُ ٱلۡمَوۡتِ بِٱلۡحَقِّۖ ذَٰلِكَ مَا كُنتَ مِنۡهُ تَحِيدُ

आयत 19

अर्थ का अनुवादमौत की बेहोशी यक़ीनन तारी होगी (जो हम बता देंगे कि) यही तो वह (हालात है) जिससे तू भागा करता था

وَنُفِخَ فِي ٱلصُّورِۚ ذَٰلِكَ يَوۡمُ ٱلۡوَعِيدِ

आयत 20

अर्थ का अनुवादऔर सूर फूँका जाएगा यही (अज़ाब) के वायदे का दिन है और हर शख़्श (हमारे सामने) (इस तरह) हाज़िर होगा

وَجَآءَتۡ كُلُّ نَفۡسࣲ مَّعَهَا سَآئِقࣱ وَشَهِيدࣱ‏

आयत 21

अर्थ का अनुवादकि उसके साथ एक (फरिश्ता) हॅका लाने वाला होगा

لَّقَدۡ كُنتَ فِي غَفۡلَةࣲ مِّنۡ هَٰذَا فَكَشَفۡنَا عَنكَ غِطَآءَكَ فَبَصَرُكَ ٱلۡيَوۡمَ حَدِيدࣱ‏

आयत 22

अर्थ का अनुवादऔर एक (आमाल का) गवाह उससे कहा जाएगा कि उस (दिन) से तू ग़फ़लत में पड़ा था तो अब हमने तेरे सामने से पर्दे को हटा दिया तो आज तेरी निगाह बड़ी तेज़ है

وَقَالَ قَرِينُهُۥ هَٰذَا مَا لَدَيَّ عَتِيدٌ

आयत 23

अर्थ का अनुवादऔर उसका साथी (फ़रिश्ता) कहेगा ये (उसका अमल) जो मेरे पास है

أَلۡقِيَا فِي جَهَنَّمَ كُلَّ كَفَّارٍ عَنِيدࣲ‏

आयत 24

अर्थ का अनुवाद(तब हुक्म होगा कि) तुम दोनों हर सरकश नाशुक्रे को दोज़ख़ में डाल दो

مَّنَّاعࣲ لِّلۡخَيۡرِ مُعۡتَدࣲ مُّرِيبٍ

आयत 25

अर्थ का अनुवादजो (वाजिब हुकूक से) माल में बुख्ल करने वाला हद से बढ़ने वाला (दीन में) शक़ करने वाला था

ٱلَّذِي جَعَلَ مَعَ ٱللَّهِ إِلَٰهًا ءَاخَرَ فَأَلۡقِيَاهُ فِي ٱلۡعَذَابِ ٱلشَّدِيدِ

आयत 26

अर्थ का अनुवादजिसने ख़ुदा के साथ दूसरे माबूद बना रखे थे तो अब तुम दोनों इसको सख्त अज़ाब में डाल ही दो

۞قَالَ قَرِينُهُۥ رَبَّنَا مَآ أَطۡغَيۡتُهُۥ وَلَٰكِن كَانَ فِي ضَلَٰلِۭ بَعِيدࣲ‏

आयत 27

अर्थ का अनुवाद(उस वक्त) उसका साथी (शैतान) कहेगा परवरदिगार हमने इसको गुमराह नहीं किया था बल्कि ये तो ख़ुद सख्त गुमराही में मुब्तिला था

قَالَ لَا تَخۡتَصِمُواْ لَدَيَّ وَقَدۡ قَدَّمۡتُ إِلَيۡكُم بِٱلۡوَعِيدِ

आयत 28

अर्थ का अनुवादइस पर ख़ुदा फ़रमाएगा हमारे सामने झगड़े न करो मैं तो तुम लोगों को पहले ही (अज़ाब से) डरा चुका था

مَا يُبَدَّلُ ٱلۡقَوۡلُ لَدَيَّ وَمَآ أَنَا۠ بِظَلَّٰمࣲ لِّلۡعَبِيدِ

आयत 29

अर्थ का अनुवादमेरे यहाँ बात बदला नहीं करती और न मैं बन्दों पर (ज़र्रा बराबर) ज़ुल्म करने वाला हूँ

يَوۡمَ نَقُولُ لِجَهَنَّمَ هَلِ ٱمۡتَلَأۡتِ وَتَقُولُ هَلۡ مِن مَّزِيدࣲ‏

आयत 30

अर्थ का अनुवादउस दिन हम दोज़ख़ से पूछेंगे कि तू भर चुकी और वह कहेगी क्या कुछ और भी हैं

وَأُزۡلِفَتِ ٱلۡجَنَّةُ لِلۡمُتَّقِينَ غَيۡرَ بَعِيدٍ

आयत 31

अर्थ का अनुवादऔर बेहिश्त परहेज़गारों के बिलकुल करीब कर दी जाएगी

هَٰذَا مَا تُوعَدُونَ لِكُلِّ أَوَّابٍ حَفِيظࣲ‏

आयत 32

अर्थ का अनुवादयही तो वह बेहिश्त है जिसका तुममें से हर एक (ख़ुदा की तरफ़) रूजू करने वाले (हुदूद की) हिफाज़त करने वाले से वायदा किया जाता है

مَّنۡ خَشِيَ ٱلرَّحۡمَٰنَ بِٱلۡغَيۡبِ وَجَآءَ بِقَلۡبࣲ مُّنِيبٍ

आयत 33

अर्थ का अनुवादतो जो शख़्श ख़ुदा से बे देखे डरता रहा और ख़ुदा की तरफ़ रूजू करने वाला दिल लेकर आया

ٱدۡخُلُوهَا بِسَلَٰمࣲۖ ذَٰلِكَ يَوۡمُ ٱلۡخُلُودِ

आयत 34

अर्थ का अनुवाद(उसको हुक्म होगा कि) इसमें सही सलामत दाख़िल हो जाओ यहीं तो हमेशा रहने का दिन है

لَهُم مَّا يَشَآءُونَ فِيهَا وَلَدَيۡنَا مَزِيدࣱ‏

आयत 35

अर्थ का अनुवादइसमें ये लोग जो चाहेंगे उनके लिए हाज़िर है और हमारे यहॉ तो इससे भी ज्यादा है

وَكَمۡ أَهۡلَكۡنَا قَبۡلَهُم مِّن قَرۡنٍ هُمۡ أَشَدُّ مِنۡهُم بَطۡشࣰ ا فَنَقَّبُواْ فِي ٱلۡبِلَٰدِ هَلۡ مِن مَّحِيصٍ

आयत 36

अर्थ का अनुवादऔर हमने तो इनसे पहले कितनी उम्मतें हलाक कर डाली जो इनसे क़ूवत में कहीं बढ़ कर थीं तो उन लोगों ने (मौत के ख़ौफ से) तमाम शहरों को छान मारा कि भला कहीं भी भागने का ठिकाना है

إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَذِكۡرَىٰ لِمَن كَانَ لَهُۥ قَلۡبٌ أَوۡ أَلۡقَى ٱلسَّمۡعَ وَهُوَ شَهِيدࣱ‏

आयत 37

अर्थ का अनुवादइसमें शक़ नहीं कि जो शख़्श (आगाह) दिल रखता है या कान लगाकर हुज़ूरे क़ल्ब से सुनता है उसके लिए इसमें (काफ़ी) नसीहत है

وَلَقَدۡ خَلَقۡنَا ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضَ وَمَا بَيۡنَهُمَا فِي سِتَّةِ أَيَّامࣲ وَمَا مَسَّنَا مِن لُّغُوبࣲ‏

आयत 38

अर्थ का अनुवादऔर हमने ही यक़ीनन सारे आसमान और ज़मीन और जो कुछ उन दोनों के बीच में है छह: दिन में पैदा किए और थकान तो हमको छुकर भी नहीं गयी

فَٱصۡبِرۡ عَلَىٰ مَا يَقُولُونَ وَسَبِّحۡ بِحَمۡدِ رَبِّكَ قَبۡلَ طُلُوعِ ٱلشَّمۡسِ وَقَبۡلَ ٱلۡغُرُوبِ

आयत 39

अर्थ का अनुवादतो (ऐ रसूल) जो कुछ ये (काफ़िर) लोग किया करते हैं उस पर तुम सब्र करो और आफ़ताब के निकलने से पहले अपने परवरदिगार के हम्द की तस्बीह किया करो

وَمِنَ ٱلَّيۡلِ فَسَبِّحۡهُ وَأَدۡبَٰرَ ٱلسُّجُودِ

आयत 40

अर्थ का अनुवादऔर थोड़ी देर रात को भी और नमाज़ के बाद भी उसकी तस्बीह करो

وَٱسۡتَمِعۡ يَوۡمَ يُنَادِ ٱلۡمُنَادِ مِن مَّكَانࣲ قَرِيبࣲ‏

आयत 41

अर्थ का अनुवादऔर कान लगा कर सुन रखो कि जिस दिन पुकारने वाला (इसराफ़ील) नज़दीक ही जगह से आवाज़ देगा

يَوۡمَ يَسۡمَعُونَ ٱلصَّيۡحَةَ بِٱلۡحَقِّۚ ذَٰلِكَ يَوۡمُ ٱلۡخُرُوجِ

आयत 42

अर्थ का अनुवाद(कि उठो) जिस दिन लोग एक सख्त चीख़ को बाख़ूबी सुन लेगें वही दिन (लोगों) के कब्रों से निकलने का होगा

إِنَّا نَحۡنُ نُحۡيِۦ وَنُمِيتُ وَإِلَيۡنَا ٱلۡمَصِيرُ

आयत 43

अर्थ का अनुवादबेशक हम ही (लोगों को) ज़िन्दा करते हैं और हम ही मारते हैं

يَوۡمَ تَشَقَّقُ ٱلۡأَرۡضُ عَنۡهُمۡ سِرَاعࣰ اۚ ذَٰلِكَ حَشۡرٌ عَلَيۡنَا يَسِيرࣱ‏

आयत 44

अर्थ का अनुवादऔर हमारी ही तरफ फिर कर आना है जिस दिन ज़मीन (उनके ऊपर से) फट जाएगी और ये झट पट निकल खड़े होंगे ये उठाना और जमा करना

نَّحۡنُ أَعۡلَمُ بِمَا يَقُولُونَۖ وَمَآ أَنتَ عَلَيۡهِم بِجَبَّارࣲۖ فَذَكِّرۡ بِٱلۡقُرۡءَانِ مَن يَخَافُ وَعِيدِ

आयत 45

अर्थ का अनुवादऔर हम पर बहुत आसान है (ऐ रसूल) ये लोग जो कुछ कहते हैं हम (उसे) ख़ूब जानते हैं और तुम उन पर जब्र तो देते नहीं हो तो जो हमारे (अज़ाब के) वायदे से डरे उसको तुम क़ुरान के ज़रिए नसीहत करते रहो

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