إِذَا جَآءَ نَصۡرُ ٱللَّهِ وَٱلۡفَتۡحُ
आयत 1
अर्थ का अनुवादऐ रसूल जब ख़ुदा की मदद आ पहँचेगी
سُوْرَةُ النَّصْرِ
सूरह 110आयतें 3 अवतरण स्थान मदनीजुज़ 30–30
بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
إِذَا جَآءَ نَصۡرُ ٱللَّهِ وَٱلۡفَتۡحُ
आयत 1
अर्थ का अनुवादऐ रसूल जब ख़ुदा की मदद आ पहँचेगी
وَرَأَيۡتَ ٱلنَّاسَ يَدۡخُلُونَ فِي دِينِ ٱللَّهِ أَفۡوَاجࣰ ا
आयत 2
अर्थ का अनुवादऔर फतेह (मक्का) हो जाएगी और तुम लोगों को देखोगे कि गोल के गोल ख़ुदा के दीन में दाख़िल हो रहे हैं
فَسَبِّحۡ بِحَمۡدِ رَبِّكَ وَٱسۡتَغۡفِرۡهُۚ إِنَّهُۥ كَانَ تَوَّابَۢا
आयत 3
अर्थ का अनुवादतो तुम अपने परवरदिगार की तारीफ़ के साथ तसबीह करना और उसी से मग़फेरत की दुआ माँगना वह बेशक बड़ा माफ़ करने वाला है