أَلَمۡ تَرَ كَيۡفَ فَعَلَ رَبُّكَ بِأَصۡحَٰبِ ٱلۡفِيلِ
आयत 1
अर्थ का अनुवादऐ रसूल क्या तुमने नहीं देखा कि तुम्हारे परवरदिगार ने हाथी वालों के साथ क्या किया
سُوْرَةُ الْفِيْلِ
सूरह 105आयतें 5 अवतरण स्थान मक्कीजुज़ 30–30
بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
أَلَمۡ تَرَ كَيۡفَ فَعَلَ رَبُّكَ بِأَصۡحَٰبِ ٱلۡفِيلِ
आयत 1
अर्थ का अनुवादऐ रसूल क्या तुमने नहीं देखा कि तुम्हारे परवरदिगार ने हाथी वालों के साथ क्या किया
أَلَمۡ يَجۡعَلۡ كَيۡدَهُمۡ فِي تَضۡلِيلࣲ
आयत 2
अर्थ का अनुवादक्या उसने उनकी तमाम तद्बीरें ग़लत नहीं कर दीं (ज़रूर)
وَأَرۡسَلَ عَلَيۡهِمۡ طَيۡرًا أَبَابِيلَ
आयत 3
अर्थ का अनुवादऔर उन पर झुन्ड की झुन्ड चिड़ियाँ भेज दीं
تَرۡمِيهِم بِحِجَارَةࣲ مِّن سِجِّيلࣲ
आयत 4
अर्थ का अनुवादजो उन पर खरन्जों की कंकरियाँ फेकती थीं
فَجَعَلَهُمۡ كَعَصۡفࣲ مَّأۡكُولِۭ
आयत 5
अर्थ का अनुवादतो उन्हें चबाए हुए भूस की (तबाह) कर दिया