وَٱلۡعَصۡرِ
आयत 1
अर्थ का अनुवादनमाज़े अस्र की क़सम
سُوْرَةُ الْعَصْرِ
सूरह 103आयतें 3 अवतरण स्थान मक्कीजुज़ 30–30
بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
وَٱلۡعَصۡرِ
आयत 1
अर्थ का अनुवादनमाज़े अस्र की क़सम
إِنَّ ٱلۡإِنسَٰنَ لَفِي خُسۡرٍ
आयत 2
अर्थ का अनुवादबेशक इन्सान घाटे में है
إِلَّا ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّٰلِحَٰتِ وَتَوَاصَوۡاْ بِٱلۡحَقِّ وَتَوَاصَوۡاْ بِٱلصَّبۡرِ
आयत 3
अर्थ का अनुवादमगर जो लोग ईमान लाए, और अच्छे काम करते रहे और आपस में हक़ का हुक्म और सब्र की वसीयत करते रहे