क़ुरआन ऑनलाइन गाइड

سُوْرَةُ الْقِيَامَةِ

Al-Qiyaama

सूरह 75आयतें 40 अवतरण स्थान मक्कीजुज़ 29–29

بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ

75:1

لَآ أُقۡسِمُ بِيَوۡمِ ٱلۡقِيَٰمَةِ

आयत 1

अर्थ का अनुवादमैं रोजे क़यामत की क़सम खाता हूँ

75:2

وَلَآ أُقۡسِمُ بِٱلنَّفۡسِ ٱللَّوَّامَةِ

आयत 2

अर्थ का अनुवाद(और बुराई से) मलामत करने वाले जी की क़सम खाता हूँ (कि तुम सब दोबारा) ज़रूर ज़िन्दा किए जाओगे

75:3

أَيَحۡسَبُ ٱلۡإِنسَٰنُ أَلَّن نَّجۡمَعَ عِظَامَهُۥ

आयत 3

अर्थ का अनुवादक्या इन्सान ये ख्याल करता है (कि हम उसकी हड्डियों को बोसीदा होने के बाद) जमा न करेंगे हाँ (ज़रूर करेंगें)

75:4

بَلَىٰ قَٰدِرِينَ عَلَىٰٓ أَن نُّسَوِّيَ بَنَانَهُۥ

आयत 4

अर्थ का अनुवादहम इस पर क़ादिर हैं कि हम उसकी पोर पोर दुरूस्त करें

75:5

بَلۡ يُرِيدُ ٱلۡإِنسَٰنُ لِيَفۡجُرَ أَمَامَهُۥ

आयत 5

अर्थ का अनुवादमगर इन्सान तो ये जानता है कि अपने आगे भी (हमेशा) बुराई करता जाए

75:6

يَسۡـَٔلُ أَيَّانَ يَوۡمُ ٱلۡقِيَٰمَةِ

आयत 6

अर्थ का अनुवादपूछता है कि क़यामत का दिन कब होगा

75:7

فَإِذَا بَرِقَ ٱلۡبَصَرُ

आयत 7

अर्थ का अनुवादतो जब ऑंखे चकाचौन्ध में आ जाएँगी

75:8

وَخَسَفَ ٱلۡقَمَرُ

आयत 8

अर्थ का अनुवादऔर चाँद गहन में लग जाएगा

75:9

وَجُمِعَ ٱلشَّمۡسُ وَٱلۡقَمَرُ

आयत 9

अर्थ का अनुवादऔर सूरज और चाँद इकट्ठा कर दिए जाएँगे

75:10

يَقُولُ ٱلۡإِنسَٰنُ يَوۡمَئِذٍ أَيۡنَ ٱلۡمَفَرُّ

आयत 10

अर्थ का अनुवादतो इन्सान कहेगा आज कहाँ भाग कर जाऊँ

75:11

كَلَّا لَا وَزَرَ

आयत 11

अर्थ का अनुवादयक़ीन जानों कहीं पनाह नहीं

75:12

إِلَىٰ رَبِّكَ يَوۡمَئِذٍ ٱلۡمُسۡتَقَرُّ

आयत 12

अर्थ का अनुवादउस रोज़ तुम्हारे परवरदिगार ही के पास ठिकाना है

75:13

يُنَبَّؤُاْ ٱلۡإِنسَٰنُ يَوۡمَئِذِۭ بِمَا قَدَّمَ وَأَخَّرَ

आयत 13

अर्थ का अनुवादउस दिन आदमी को जो कुछ उसके आगे पीछे किया है बता दिया जाएगा

75:14

بَلِ ٱلۡإِنسَٰنُ عَلَىٰ نَفۡسِهِۦ بَصِيرَةࣱ‏

आयत 14

अर्थ का अनुवादबल्कि इन्सान तो अपने ऊपर आप गवाह है

75:15

وَلَوۡ أَلۡقَىٰ مَعَاذِيرَهُۥ

आयत 15

अर्थ का अनुवादअगरचे वह अपने गुनाहों की उज्र व ज़रूर माज़ेरत पढ़ा करता रहे

75:16

لَا تُحَرِّكۡ بِهِۦ لِسَانَكَ لِتَعۡجَلَ بِهِۦٓ

आयत 16

अर्थ का अनुवाद(ऐ रसूल) वही के जल्दी याद करने वास्ते अपनी ज़बान को हरकत न दो

75:17

إِنَّ عَلَيۡنَا جَمۡعَهُۥ وَقُرۡءَانَهُۥ

आयत 17

अर्थ का अनुवादउसका जमा कर देना और पढ़वा देना तो यक़ीनी हमारे ज़िम्मे है

75:18

فَإِذَا قَرَأۡنَٰهُ فَٱتَّبِعۡ قُرۡءَانَهُۥ

आयत 18

अर्थ का अनुवादतो जब हम उसको (जिबरील की ज़बानी) पढ़ें तो तुम भी (पूरा) सुनने के बाद इसी तरह पढ़ा करो

75:19

ثُمَّ إِنَّ عَلَيۡنَا بَيَانَهُۥ

आयत 19

अर्थ का अनुवादफिर उस (के मुश्किलात का समझा देना भी हमारे ज़िम्में है)

75:20

كَلَّا بَلۡ تُحِبُّونَ ٱلۡعَاجِلَةَ

आयत 20

अर्थ का अनुवादमगर (लोगों) हक़ तो ये है कि तुम लोग दुनिया को दोस्त रखते हो

75:21

وَتَذَرُونَ ٱلۡأٓخِرَةَ

आयत 21

अर्थ का अनुवादऔर आख़ेरत को छोड़े बैठे हो

75:22

وُجُوهࣱ يَوۡمَئِذࣲ نَّاضِرَةٌ

आयत 22

अर्थ का अनुवादउस रोज़ बहुत से चेहरे तो तरो ताज़ा बशबाब होंगे

75:23

إِلَىٰ رَبِّهَا نَاظِرَةࣱ‏

आयत 23

अर्थ का अनुवाद(और) अपने परवरदिगार (की नेअमत) को देख रहे होंगे

75:24

وَوُجُوهࣱ يَوۡمَئِذِۭ بَاسِرَةࣱ‏

आयत 24

अर्थ का अनुवादऔर बहुतेरे मुँह उस दिन उदास होंगे

75:25

تَظُنُّ أَن يُفۡعَلَ بِهَا فَاقِرَةࣱ‏

आयत 25

अर्थ का अनुवादसमझ रहें हैं कि उन पर मुसीबत पड़ने वाली है कि कमर तोड़ देगी

75:26

كَلَّآ إِذَا بَلَغَتِ ٱلتَّرَاقِيَ

आयत 26

अर्थ का अनुवादसुन लो जब जान (बदन से खिंच के) हँसली तक आ पहुँचेगी

75:27

وَقِيلَ مَنۡۜ رَاقࣲ‏

आयत 27

अर्थ का अनुवादऔर कहा जाएगा कि (इस वक्त) क़ोई झाड़ फूँक करने वाला है

75:28

وَظَنَّ أَنَّهُ ٱلۡفِرَاقُ

आयत 28

अर्थ का अनुवादऔर मरने वाले ने समझा कि अब (सबसे) जुदाई है

75:29

وَٱلۡتَفَّتِ ٱلسَّاقُ بِٱلسَّاقِ

आयत 29

अर्थ का अनुवादऔर (मौत की तकलीफ़ से) पिन्डली से पिन्डली लिपट जाएगी

75:30

إِلَىٰ رَبِّكَ يَوۡمَئِذٍ ٱلۡمَسَاقُ

आयत 30

अर्थ का अनुवादउस दिन तुमको अपने परवरदिगार की बारगाह में चलना है

75:31

فَلَا صَدَّقَ وَلَا صَلَّىٰ

आयत 31

अर्थ का अनुवादतो उसने (ग़फलत में) न (कलामे ख़ुदा की) तसदीक़ की न नमाज़ पढ़ी

75:32

وَلَٰكِن كَذَّبَ وَتَوَلَّىٰ

आयत 32

अर्थ का अनुवादमगर झुठलाया और (ईमान से) मुँह फेरा

75:33

ثُمَّ ذَهَبَ إِلَىٰٓ أَهۡلِهِۦ يَتَمَطَّىٰٓ

आयत 33

अर्थ का अनुवादअपने घर की तरफ इतराता हुआ चला

75:34

أَوۡلَىٰ لَكَ فَأَوۡلَىٰ

आयत 34

अर्थ का अनुवादअफसोस है तुझ पर फिर अफसोस है फिर तुफ़ है

75:35

ثُمَّ أَوۡلَىٰ لَكَ فَأَوۡلَىٰٓ

आयत 35

अर्थ का अनुवादतुझ पर फिर तुफ़ है

75:36

أَيَحۡسَبُ ٱلۡإِنسَٰنُ أَن يُتۡرَكَ سُدًى

आयत 36

अर्थ का अनुवादक्या इन्सान ये समझता है कि वह यूँ ही छोड़ दिया जाएगा

75:37

أَلَمۡ يَكُ نُطۡفَةࣰ مِّن مَّنِيࣲّ يُمۡنَىٰ

आयत 37

अर्थ का अनुवादक्या वह (इब्तेदन) मनी का एक क़तरा न था जो रहम में डाली जाती है

75:38

ثُمَّ كَانَ عَلَقَةࣰ فَخَلَقَ فَسَوَّىٰ

आयत 38

अर्थ का अनुवादफिर लोथड़ा हुआ फिर ख़ुदा ने उसे बनाया

75:39

فَجَعَلَ مِنۡهُ ٱلزَّوۡجَيۡنِ ٱلذَّكَرَ وَٱلۡأُنثَىٰٓ

आयत 39

अर्थ का अनुवादफिर उसे दुरूस्त किया फिर उसकी दो किस्में बनायीं (एक) मर्द और (एक) औरत

75:40

أَلَيۡسَ ذَٰلِكَ بِقَٰدِرٍ عَلَىٰٓ أَن يُحۡـِۧيَ ٱلۡمَوۡتَىٰ

आयत 40

अर्थ का अनुवादक्या इस पर क़ादिर नहीं कि (क़यामत में) मुर्दों को ज़िन्दा कर दे

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