حمٓ
आयत 1
अर्थ का अनुवादहा मीम
سُوْرَةُ الدُّخَانِ
सूरह 44आयतें 59 अवतरण स्थान मक्कीजुज़ 25–25
بِسۡمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحۡمَٰنِ ٱلرَّحِيمِ
حمٓ
आयत 1
अर्थ का अनुवादहा मीम
وَٱلۡكِتَٰبِ ٱلۡمُبِينِ
आयत 2
अर्थ का अनुवादवाज़ेए व रौशन किताब (कुरान) की क़सम
إِنَّآ أَنزَلۡنَٰهُ فِي لَيۡلَةࣲ مُّبَٰرَكَةٍۚ إِنَّا كُنَّا مُنذِرِينَ
आयत 3
अर्थ का अनुवादहमने इसको मुबारक रात (शबे क़द्र) में नाज़िल किया बेशक हम (अज़ाब से) डराने वाले थे
فِيهَا يُفۡرَقُ كُلُّ أَمۡرٍ حَكِيمٍ
आयत 4
अर्थ का अनुवादइसी रात को तमाम दुनिया के हिक़मत व मसलेहत के (साल भर के) काम फ़ैसले किये जाते हैं
أَمۡرࣰ ا مِّنۡ عِندِنَآۚ إِنَّا كُنَّا مُرۡسِلِينَ
आयत 5
अर्थ का अनुवादयानि हमारे यहाँ से हुक्म होकर (बेशक) हम ही (पैग़म्बरों के) भेजने वाले हैं
رَحۡمَةࣰ مِّن رَّبِّكَۚ إِنَّهُۥ هُوَ ٱلسَّمِيعُ ٱلۡعَلِيمُ
आयत 6
अर्थ का अनुवादये तुम्हारे परवरदिगार की मेहरबानी है, वह बेशक बड़ा सुनने वाला वाक़िफ़कार है
رَبِّ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِ وَمَا بَيۡنَهُمَآۖ إِن كُنتُم مُّوقِنِينَ
आयत 7
अर्थ का अनुवादसारे आसमान व ज़मीन और जो कुछ इन दोनों के दरमियान है सबका मालिक
لَآ إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ يُحۡيِۦ وَيُمِيتُۖ رَبُّكُمۡ وَرَبُّ ءَابَآئِكُمُ ٱلۡأَوَّلِينَ
आयत 8
अर्थ का अनुवादअगर तुममें यक़ीन करने की सलाहियत है (तो करो) उसके सिवा कोई माबूद नहीं - वही जिलाता है वही मारता है तुम्हारा मालिक और तुम्हारे (अगले) बाप दादाओं का भी मालिक है
بَلۡ هُمۡ فِي شَكࣲّ يَلۡعَبُونَ
आयत 9
अर्थ का अनुवादलेकिन ये लोग तो शक़ में पड़े खेल रहे हैं
فَٱرۡتَقِبۡ يَوۡمَ تَأۡتِي ٱلسَّمَآءُ بِدُخَانࣲ مُّبِينࣲ
आयत 10
अर्थ का अनुवादतो तुम उस दिन का इन्तेज़ार करो कि आसमान से ज़ाहिर ब ज़ाहिर धुऑं निकलेगा
يَغۡشَى ٱلنَّاسَۖ هَٰذَا عَذَابٌ أَلِيمࣱ
आयत 11
अर्थ का अनुवाद(और) लोगों को ढाँक लेगा ये दर्दनाक अज़ाब है
رَّبَّنَا ٱكۡشِفۡ عَنَّا ٱلۡعَذَابَ إِنَّا مُؤۡمِنُونَ
आयत 12
अर्थ का अनुवादकुफ्फ़ार भी घबराकर कहेंगे कि परवरदिगार हमसे अज़ाब को दूर दफ़ा कर दे हम भी ईमान लाते हैं
أَنَّىٰ لَهُمُ ٱلذِّكۡرَىٰ وَقَدۡ جَآءَهُمۡ رَسُولࣱ مُّبِينࣱ
आयत 13
अर्थ का अनुवाद(उस वक्त) भला क्या उनको नसीहत होगी जब उनके पास पैग़म्बर आ चुके जो साफ़ साफ़ बयान कर देते थे
ثُمَّ تَوَلَّوۡاْ عَنۡهُ وَقَالُواْ مُعَلَّمࣱ مَّجۡنُونٌ
आयत 14
अर्थ का अनुवादइस पर भी उन लोगों ने उससे मुँह फेरा और कहने लगे ये तो (सिखाया) पढ़ाया हुआ दीवाना है
إِنَّا كَاشِفُواْ ٱلۡعَذَابِ قَلِيلًاۚ إِنَّكُمۡ عَآئِدُونَ
आयत 15
अर्थ का अनुवाद(अच्छा ख़ैर) हम थोड़े दिन के लिए अज़ाब को टाल देते हैं मगर हम जानते हैं तुम ज़रूर फिर कुफ्र करोगे
يَوۡمَ نَبۡطِشُ ٱلۡبَطۡشَةَ ٱلۡكُبۡرَىٰٓ إِنَّا مُنتَقِمُونَ
आयत 16
अर्थ का अनुवादहम बेशक (उनसे) पूरा बदला तो बस उस दिन लेगें जिस दिन सख्त पकड़ पकड़ेंगे
۞وَلَقَدۡ فَتَنَّا قَبۡلَهُمۡ قَوۡمَ فِرۡعَوۡنَ وَجَآءَهُمۡ رَسُولࣱ كَرِيمٌ
आयत 17
अर्थ का अनुवादऔर उनसे पहले हमने क़ौमे फिरऔन की आज़माइश की और उनके पास एक आली क़दर पैग़म्बर (मूसा) आए
أَنۡ أَدُّوٓاْ إِلَيَّ عِبَادَ ٱللَّهِۖ إِنِّي لَكُمۡ رَسُولٌ أَمِينࣱ
आयत 18
अर्थ का अनुवाद(और कहा) कि ख़ुदा के बन्दों (बनी इसराईल) को मेरे हवाले कर दो मैं (ख़ुदा की तरफ से) तुम्हारा एक अमानतदार पैग़म्बर हूँ
وَأَن لَّا تَعۡلُواْ عَلَى ٱللَّهِۖ إِنِّيٓ ءَاتِيكُم بِسُلۡطَٰنࣲ مُّبِينࣲ
आयत 19
अर्थ का अनुवादऔर ख़ुदा के सामने सरकशी न करो मैं तुम्हारे पास वाज़ेए व रौशन दलीलें ले कर आया हूँ
وَإِنِّي عُذۡتُ بِرَبِّي وَرَبِّكُمۡ أَن تَرۡجُمُونِ
आयत 20
अर्थ का अनुवादऔर इस बात से कि तुम मुझे संगसार करो मैं अपने और तुम्हारे परवरदिगार (ख़ुदा) की पनाह मांगता हूँ
وَإِن لَّمۡ تُؤۡمِنُواْ لِي فَٱعۡتَزِلُونِ
आयत 21
अर्थ का अनुवादऔर अगर तुम मुझ पर ईमान नहीं लाए तो तुम मुझसे अलग हो जाओ
فَدَعَا رَبَّهُۥٓ أَنَّ هَٰٓؤُلَآءِ قَوۡمࣱ مُّجۡرِمُونَ
आयत 22
अर्थ का अनुवाद(मगर वह सुनाने लगे) तब मूसा ने अपने परवरदिगार से दुआ की कि ये बड़े शरीर लोग हैं
فَأَسۡرِ بِعِبَادِي لَيۡلًا إِنَّكُم مُّتَّبَعُونَ
आयत 23
अर्थ का अनुवादतो ख़ुदा ने हुक्म दिया कि तुम मेरे बन्दों (बनी इसराईल) को रातों रात लेकर चले जाओ और तुम्हारा पीछा भी ज़रूर किया जाएगा
وَٱتۡرُكِ ٱلۡبَحۡرَ رَهۡوًاۖ إِنَّهُمۡ جُندࣱ مُّغۡرَقُونَ
आयत 24
अर्थ का अनुवादऔर दरिया को अपनी हालत पर ठहरा हुआ छोड़ कर (पार हो) जाओ (तुम्हारे बाद) उनका सारा लशकर डुबो दिया जाएगा
كَمۡ تَرَكُواْ مِن جَنَّٰتࣲ وَعُيُونࣲ
आयत 25
अर्थ का अनुवादवह लोग (ख़ुदा जाने) कितने बाग़ और चश्में और खेतियाँ
وَزُرُوعࣲ وَمَقَامࣲ كَرِيمࣲ
आयत 26
अर्थ का अनुवादऔर नफीस मकानात और आराम की चीज़ें
وَنَعۡمَةࣲ كَانُواْ فِيهَا فَٰكِهِينَ
आयत 27
अर्थ का अनुवादजिनमें वह ऐश और चैन किया करते थे छोड़ गये यूँ ही हुआ
كَذَٰلِكَۖ وَأَوۡرَثۡنَٰهَا قَوۡمًا ءَاخَرِينَ
आयत 28
अर्थ का अनुवादऔर उन तमाम चीज़ों का दूसरे लोगों को मालिक बना दिया
فَمَا بَكَتۡ عَلَيۡهِمُ ٱلسَّمَآءُ وَٱلۡأَرۡضُ وَمَا كَانُواْ مُنظَرِينَ
आयत 29
अर्थ का अनुवादतो उन लोगों पर आसमान व ज़मीन को भी रोना न आया और न उन्हें मोहलत ही दी गयी
وَلَقَدۡ نَجَّيۡنَا بَنِيٓ إِسۡرَٰٓءِيلَ مِنَ ٱلۡعَذَابِ ٱلۡمُهِينِ
आयत 30
अर्थ का अनुवादऔर हमने बनी इसराईल को ज़िल्लत के अज़ाब से फिरऔन (के पन्जे) से नजात दी
مِن فِرۡعَوۡنَۚ إِنَّهُۥ كَانَ عَالِيࣰ ا مِّنَ ٱلۡمُسۡرِفِينَ
आयत 31
अर्थ का अनुवादवह बेशक सरकश और हद से बाहर निकल गया था
وَلَقَدِ ٱخۡتَرۡنَٰهُمۡ عَلَىٰ عِلۡمٍ عَلَى ٱلۡعَٰلَمِينَ
आयत 32
अर्थ का अनुवादऔर हमने बनी इसराईल को समझ बूझ कर सारे जहॉन से बरगुज़ीदा किया था
وَءَاتَيۡنَٰهُم مِّنَ ٱلۡأٓيَٰتِ مَا فِيهِ بَلَٰٓؤࣱ اْ مُّبِينٌ
आयत 33
अर्थ का अनुवादऔर हमने उनको ऐसी निशानियाँ दी थीं जिनमें (उनकी) सरीही आज़माइश थी
إِنَّ هَٰٓؤُلَآءِ لَيَقُولُونَ
आयत 34
अर्थ का अनुवादये (कुफ्फ़ारे मक्का) (मुसलमानों से) कहते हैं
إِنۡ هِيَ إِلَّا مَوۡتَتُنَا ٱلۡأُولَىٰ وَمَا نَحۡنُ بِمُنشَرِينَ
आयत 35
अर्थ का अनुवादकि हमें तो सिर्फ एक बार मरना है और फिर हम दोबारा (ज़िन्दा करके) उठाए न जाएँगे
فَأۡتُواْ بِـَٔابَآئِنَآ إِن كُنتُمۡ صَٰدِقِينَ
आयत 36
अर्थ का अनुवादतो अगर तुम सच्चे हो तो हमारे बाप दादाओं को (ज़िन्दा करके) ले आओ
أَهُمۡ خَيۡرٌ أَمۡ قَوۡمُ تُبَّعࣲ وَٱلَّذِينَ مِن قَبۡلِهِمۡ أَهۡلَكۡنَٰهُمۡۚ إِنَّهُمۡ كَانُواْ مُجۡرِمِينَ
आयत 37
अर्थ का अनुवादभला ये लोग (क़ूवत में) अच्छे हैं या तुब्बा की क़ौम और वह लोग जो उनसे पहले हो चुके हमने उन सबको हलाक कर दिया (क्योंकि) वह ज़रूर गुनाहगार थे
وَمَا خَلَقۡنَا ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضَ وَمَا بَيۡنَهُمَا لَٰعِبِينَ
आयत 38
अर्थ का अनुवादऔर हमने सारे आसमान व ज़मीन और जो चीज़े उन दोनों के दरमियान में हैं उनको खेलते हुए नहीं बनाया
مَا خَلَقۡنَٰهُمَآ إِلَّا بِٱلۡحَقِّ وَلَٰكِنَّ أَكۡثَرَهُمۡ لَا يَعۡلَمُونَ
आयत 39
अर्थ का अनुवादइन दोनों को हमने बस ठीक (मसलहत से) पैदा किया मगर उनमें के बहुतेरे लोग नहीं जानते
إِنَّ يَوۡمَ ٱلۡفَصۡلِ مِيقَٰتُهُمۡ أَجۡمَعِينَ
आयत 40
अर्थ का अनुवादबेशक फ़ैसला (क़यामत) का दिन उन सब (के दोबार ज़िन्दा होने) का मुक़र्रर वक्त है
يَوۡمَ لَا يُغۡنِي مَوۡلًى عَن مَّوۡلࣰ ى شَيۡـࣰٔ ا وَلَا هُمۡ يُنصَرُونَ
आयत 41
अर्थ का अनुवादजिस दिन कोई दोस्त किसी दोस्त के कुछ काम न आएगा और न उन की मदद की जाएगी
إِلَّا مَن رَّحِمَ ٱللَّهُۚ إِنَّهُۥ هُوَ ٱلۡعَزِيزُ ٱلرَّحِيمُ
आयत 42
अर्थ का अनुवादमगर जिन पर ख़ुदा रहम फरमाए बेशक वह (ख़ुदा) सब पर ग़ालिब बड़ा रहम करने वाला है
إِنَّ شَجَرَتَ ٱلزَّقُّومِ
आयत 43
अर्थ का अनुवाद(आख़ेरत में) थोहड़ का दरख्त
طَعَامُ ٱلۡأَثِيمِ
आयत 44
अर्थ का अनुवादज़रूर गुनेहगार का खाना होगा
كَٱلۡمُهۡلِ يَغۡلِي فِي ٱلۡبُطُونِ
आयत 45
अर्थ का अनुवादजैसे पिघला हुआ तांबा वह पेटों में इस तरह उबाल खाएगा
كَغَلۡيِ ٱلۡحَمِيمِ
आयत 46
अर्थ का अनुवादजैसे खौलता हुआ पानी उबाल खाता है
خُذُوهُ فَٱعۡتِلُوهُ إِلَىٰ سَوَآءِ ٱلۡجَحِيمِ
आयत 47
अर्थ का अनुवाद(फरिश्तों को हुक्म होगा) इसको पकड़ो और घसीटते हुए दोज़ख़ के बीचों बीच में ले जाओ
ثُمَّ صُبُّواْ فَوۡقَ رَأۡسِهِۦ مِنۡ عَذَابِ ٱلۡحَمِيمِ
आयत 48
अर्थ का अनुवादफिर उसके सर पर खौलते हुए पानी का अज़ाब डालो फिर उससे ताआनन कहा जाएगा अब मज़ा चखो
ذُقۡ إِنَّكَ أَنتَ ٱلۡعَزِيزُ ٱلۡكَرِيمُ
आयत 49
अर्थ का अनुवादबेशक तू तो बड़ा इज्ज़त वाला सरदार है
إِنَّ هَٰذَا مَا كُنتُم بِهِۦ تَمۡتَرُونَ
आयत 50
अर्थ का अनुवादये वही दोज़ख़ तो है जिसमें तुम लोग शक़ किया करते थे
إِنَّ ٱلۡمُتَّقِينَ فِي مَقَامٍ أَمِينࣲ
आयत 51
अर्थ का अनुवादबेशक परहेज़गार लोग अमन की जगह
فِي جَنَّٰتࣲ وَعُيُونࣲ
आयत 52
अर्थ का अनुवाद(यानि) बाग़ों और चश्मों में होंगे
يَلۡبَسُونَ مِن سُندُسࣲ وَإِسۡتَبۡرَقࣲ مُّتَقَٰبِلِينَ
आयत 53
अर्थ का अनुवादरेशम की कभी बारीक़ और कभी दबीज़ पोशाकें पहने हुए एक दूसरे के आमने सामने बैठे होंगे
كَذَٰلِكَ وَزَوَّجۡنَٰهُم بِحُورٍ عِينࣲ
आयत 54
अर्थ का अनुवादऐसा ही होगा और हम बड़ी बड़ी ऑंखों वाली हूरों से उनके जोड़े लगा देंगे
يَدۡعُونَ فِيهَا بِكُلِّ فَٰكِهَةٍ ءَامِنِينَ
आयत 55
अर्थ का अनुवादवहाँ इत्मेनान से हर किस्म के मेवे मंगवा कर खायेंगे
لَا يَذُوقُونَ فِيهَا ٱلۡمَوۡتَ إِلَّا ٱلۡمَوۡتَةَ ٱلۡأُولَىٰۖ وَوَقَىٰهُمۡ عَذَابَ ٱلۡجَحِيمِ
आयत 56
अर्थ का अनुवादवहाँ पहली दफ़ा की मौत के सिवा उनको मौत की तलख़ी चख़नी ही न पड़ेगी और ख़ुदा उनको दोज़ख़ के अज़ाब से महफूज़ रखेगा
فَضۡلࣰ ا مِّن رَّبِّكَۚ ذَٰلِكَ هُوَ ٱلۡفَوۡزُ ٱلۡعَظِيمُ
आयत 57
अर्थ का अनुवाद(ये) तुम्हारे परवरदिगार का फज़ल है यही तो बड़ी कामयाबी है
فَإِنَّمَا يَسَّرۡنَٰهُ بِلِسَانِكَ لَعَلَّهُمۡ يَتَذَكَّرُونَ
आयत 58
अर्थ का अनुवादतो हमने इस क़ुरान को तुम्हारी ज़बान में (इसलिए) आसान कर दिया है ताकि ये लोग नसीहत पकड़ें तो
فَٱرۡتَقِبۡ إِنَّهُم مُّرۡتَقِبُونَ
आयत 59
अर्थ का अनुवाद(नतीजे के) तुम भी मुन्तज़िर रहो ये लोग भी मुन्तज़िर हैं